पेशोपेश में महामहिम!

0भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए खास तीन नेता कर रहे पैरवी

0जिलाध्यक्ष पद पर कुल 12 नेताओं ने की है दावेदारी

0कभी भी जिलाध्यक्ष का चेहरा भाजपा कर सकती है घोषित

0मनोज सिन्हा की पसंद का चेहरा ही होगा अगला जिलाध्यक्ष

अजीत केआर सिंह, गाजीपुर। भाजपा जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर महामहिम पेशोपेश में हैं। कश्मीर की ठंडी हवाएं यह तय नहीं कर पा रही हैं कि गाजीपुर का जिलाध्यक्ष किसको बनाया जाए। क्योंकि महामहिम के तीन खास नेता ही तीन गुटों में बंटकर अपनी अपनी पसंद के चेहरे को जिलाध्यक्ष बनाने के लिए इशारों में ही इशारा कर रहे हैं।

अब सवाल उठता है कि महामहिम किस को जिलाध्यक्ष बनाकर अपने होने की निशानी पेश करें। जबकि तीनों अपने ही हैं। इसको लेकर भाजपा में जबरदस्त हलचल मची हुई हैै। सभी की नजरें राजधानी से जारी होनी वाली सूची पर टिकी हुई हैै। रोज फोन की घंटियां भाजपा के प्रदेश कार्यालय में घनघना रही हैं। मगर कोई स्पष्ट जवाब देने की स्थिति में नही हैं। ऐसा माना जा रहा है कि दिल्ली के सीएम चेहरे की घोषणा के बाद यूपी का नंबर आएगा।

भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए करीब एक महीने से हलचल मची हुई है। पहले दो दर्जन उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया था। मगर सिर्फ एक दर्जन नामों की सूची प्रदेश कार्यालय पर भेजी गई थी। जिसमें प्रमुख नाम वर्तमान जिलाध्यक्ष सुनील सिंह, मनोज सिंह बस्तपुर और रेवतीपुर के ओमप्रकाश राय, प्रवीण सिंह बबुआ, अच्छे गुप्ता, कासिमाबाद क्षेत्र से धर्मेंद्र राय सहित अन्य कुल 12 नाम शामिल हैं।

देखा जाए तो मनोज सिन्हा के कुछ खास लोग अपने अपने तरीके से गुपचुप अपने उम्मीदवार की पैरवी करने में जुटे हुए हैं। जिसमें पहला नाम केबी राय का आता हैैै।

केबी राय मनोज सिन्हा का चुनावी प्रबंधन वर्ष 1984 से ही देख रहे हैं। जब केबी राय भांवरकोल मंडल के अध्यक्ष थे। वह मनोज सिन्हा के एक तरह से आंख कान माने जाते हैं। वह हमेशा से पर्दे के पीछे ही सियासी गोटी बैठाकर अच्छे अच्छों को चित करने में माहिर माने जाते हैं। उनके ही इशारे पर जिले की पूरी भाजपा दौड़ लगाती है। भाजपा का जिलाध्यक्ष कोई भी हो, मगर केबी राय की हर नीतिगत कार्यों में सहमति जरूरी है। एक तरह से वह महामहिम के संदेशवाहक माने जाते हैं। ऐसे समझिए तो वह मनोज सिन्हा के दूसरे रूप हैं। केबी राय की दिली इच्छा है कि सुनील सिंह का कार्यकाल अधूरा रहा है, उनको एक और मौका दिया जाए, लेकिन यह बात उन्होंने इशारे इशारों में किससे कही है हर कोई जानता है। उनकी पहली पसंद सुनील हैं।

दूसरा नाम आता है भानुप्रताप सिंह का। भानु प्रताप सिंह दो बार भाजपा जिलाध्यक्ष रहे हैं। मनोज सिन्हा जब भी जिले में आते हैं तो भानु जरूर उनके बगल में ही दिखाई देते हैं। इसलिए भानु चाहते हैं कि ओमप्रकाश राय, प्रवीण सिंह बबुआ और पिछड़ी जाति से अच्छे गुप्ता ही जिलाध्यक्ष बनाए जाएं। मगर भानु भी इशारों में कहते हैं और उन्होंने सिन्हा जी के कान में यह बात कही है। चूंकि सिन्हा जी का स्वभाव है कि सुनकर आंखों में ही आंखें डालकर इशारा कर देते हैं।

अब तीसरे भाजपा के धुरंधर पैरवीकार का नाम पारस राय है। यह वही पारस राय हैं जिन्हें मनोज सिन्हा की पैरवी पर भाजपा ने लोकसभा का टिकट दिया था। यह टिकट मनोज सिन्हा अपने बेटे अभिनव सिन्हा को न दिलाकर पारस राय के त्याग और उनके प्रति समपर्ण के भाव को देखते हुए एक बड़ा पुरस्कार था। तभी तो सवा चार लाख वोट पारस को मिल गया था, अगर अभिनव मैदान में होते तो शायद सवा लाख की जीत अफजाल की नहीं हो पाती। क्योंकि अभिनव सिन्हा को लेकर युवाओं में गजब का करंट देखने को मिलता है। उनके प्रति हर किसी का आकर्षण उनके प्रति दीवानगी को दर्शाता है। एक तरह से देखा जाए तो 2024 के लोकसभा चुनाव में पारस को लड़ाना मनोज सिन्हा की सबसे बड़ी सियासी भूल थी। इसकी पीछे की मंशा पर कई सवाल भी खड़े हुए थे। खैर पारस राय भी अपने अति करीबी राजपूत समाज के बेटे मनोज सिंह को ही चाहते हैं कि उनका खास जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हो जाए। मनोज सिंह युवा हैं और भाजपा के कई महत्वपूर्ण पदों को संभाल चुके हैं। सबसे खास बात है कि मनोज सिन्हा के पुत्र अभिनव भी चाहते हैं कि मनोज सिंह भाजपा के अगले जिलाध्यक्ष बनाया जाए। जब भी अभिनव गाजीपुर में रहते हैं तो उनके साथ साये की तरह मनोज दिखाई देते हैं।

मगर सुनील सिंह का पलड़ा अभी भी भारी है। क्योंकि सुनील सिंह का कार्यकाल अधूरा है, उन्होंने अपनी जिले की टीम भी गठित नहीं कर पाए हैं। दूसरे नंबर पर मनोज सिंह और ओमप्रकाश राय में किसी एक चेहरे की भी किस्मत चमक सकती है। यह भी दोनों सिन्हा के अति करीबी बताए जाते हैं। (नोटः- यह खबर चर्चाओं पर आधारित है।)



अन्य समाचार