भूमिहार वोटों को सहेजेंगे ओमप्रकाश राय

0सुनील को हटवाने में सिन्हा को कौन मनाने में हुआ सफल
0लोस चुनाव से ही सुनील से नाराज थी सिन्हा की एक लाबी
0ओमप्रकाश के बहाने भूमिहारों को एकजुट करने की है तैयारी
अजीत केआर सिंह, गाजीपुर। स्थानः- भाजपा कार्यालय छावनी लाइन...। तारीख थी 16 मार्च 2025। दिन रविवार। समय दोपहर दो बजे। जैसे ही मंच पर बैठे यहां के जिला प्रभारी राकेश त्रिवेदी माइक की तरफ आगे बढ़ते हैं तो सभी भाजपा जिलाध्यक्ष पद के उम्मीदवारों में हलचल मच जाती है। खासकर निवर्तमान जिलाध्यक्ष सुनील सिंह एवं युवा भाजपा नेता मनोज सिंह की।
माइक पकड़ते ही राकेश त्रिवेदी मोबाइल की स्क्रीन पर आंखें गड़ाते हुए घोषणा करते हैं कि भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर ओमप्रकाश राय को मनोनीत किया जाता है। इसके बाद तालियों की गड़गड़ाट से पूरा मंडप गूंज जाता है। ओमप्रकाश राय के जिलाध्यक्ष घोषित होने के बाद सभी की जुबान पर एक ही सवाल था। आखिर ओमप्रकाश राय कैसे जिलाध्यक्ष बन गए। सुनील सिंह रिपीट क्यों नहीं हुए।
भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए कुल 19 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया था जिसमें 12 उम्मीदवारों के पर्चे वैध किए गए थे। कई महीनों के इंतजार के बाद बीते रविवार को सुनील सिंह को हटाकर जिलाध्यक्ष पद पर ओमप्रकाश राय की ताजपोशी हो गई। जिलाध्यक्ष पद के लिए मुख्य तौर पर सुनील सिंह, मनोज सिंह, ओमप्रकाश राय एवं प्रवीण सिंह बबुआ की चर्चा थी। यह भी था कि कहीं दलित महिला को गाजीपुर की कमान सौंपी न दी जाए। ओमप्रकाश राय की घोषणा के बाद उनकी ताजपोशी की पटकथा लोकसभा चुनाव के दरमियान ही लिख दी गई थी।
इस पटकथा में पारस नाथ राय, भानु प्रताप सिंह मुख्य भूमिका में थे। हालांकि उक्त दोनों नेता भी सिन्हा गुट के हैं। शुरूआती दौर में भानु प्रवीण सिंह को चाहते थे, मगर जैसे ही पारस राय का साथ मिला तो वह भी ओमप्रकाश के साथ हो गए थे। चूंकि पारस राय के अति करीबी मनोज सिंह ने हाई कमान का फोन आने के बाद ही अंतिम समय में पर्चा दाखिल किया था। अब सवाल उठा कि सुनील को हटाने के बाद मनोज सिंह का नाम फाइल था तो फिर ओमप्रकाश राय कैसे आ गए।
2027 में विधानसभा का चुनाव होना है। यहां की सातों सीटें सपा के कब्जे में हैं। भाजपा को सातों सीटें जीतना चांद के पार पहुंचने के बराबर है। सियासत के जानकारों का मानना है कि मुहम्मदाबाद के भूमिहार एकजुट हुए तो कभी भी अंसारियों को जीत नहीं मिल सकेगी। अब देखना होगा कि ओमप्रकाश राय भूमिहार वोटरों को किस हद तक मुहम्मदाबाद में एकजुट करने में सफल होते हैं।
भूमिहार बाहुल्य सीट पर अंसारियों का कब्जा
गाजीपुर। मुहम्मदाबाद विधानसभा की सीट सर्वाधिक भूमिहार बाहुल्य है। ऐसा कहा जाता है कि एक लाख बीस हजार मतदाता भूमिहार समाज से आते हैं। 29 नवम्बर 2005 में विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद 2022 के विधानसभा चुनाव तक एक उपचुनाव छोड़ दिया जाए तो सिर्फ 2017 का विधानसभा चुनाव अलका राय जीत सकी हैं। अब सवाल उठता है कि भूमिहार बाहुल्य विधानसभा होने के बाद भी भाजपा क्यों नहीं जीत पा रही है। तब इस बात का सियासी खुलासा होता है कि यहां पर अंसारी परिवार भूमिहार वोटरों को बांटने में सफल हो जाता है। यानि भूमिहार वोटों का तेजी से ध्रुवीकरण होता है। साथ ही अंसारी परिवार को हराने के लिए भूमिहार मतदाता एकजुट नहीं होते हैं। इधर पूरे पूर्वांचल में एक भी भूमिहार जिलाध्यक्ष नहीं बनाया गया था, इस लिहाज से भाजपा ने कश्मीर वाले साहेब की सिफारिश पर ओपी राय का नाम आगे कर दिया। जबकि संघ इस बार भी सुनील सिंह के ही पक्ष में था। मुहम्मदाबाद विधानसभा में कृष्णानंद राय की शहादत के बाद 2006 के उपचुनाव में उनकी पत्नी अलका राय विधायक निर्वाचित हुईं। 2007 के चुनाव में सांसद अफजाल के बड़े भाई सिबगतुल्लाह विधायक बन गए। 2012 में भी उन्हें दूसरी बार विधायक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 2017 में अलका राय दूसरी बार अंसारियों को हराने में सफल रहीं। मगर जब 2022 का चुनाव आया और बुल्डोजर की गर्जना से पूरा करईल में अंसारी परिवार थर्राता रहा तब भी अलका राय नहीं जीत सकीं। उन्हें 18759 मतों से चुनाव हारना पड़ा। मुहम्मदाबाद की हार की चर्चा दिल्ली तक हुई।
पीयूष और मुन्ना में सियासी रार
सबसे मजेदार बात यह है कि कृष्णानंद राय के पुत्र पीयूष राय और भांवरकोल ब्लाक प्रमुख पति आनंद राय मुन्ना के बीच सियासी खिंचतान वर्षों से हैै। दोनों मुहम्मदाबाद की विरासत पर अपना दावा करते हैं। अब सवाल उठता है कि कृष्णानंद राय के परिवार को विधायक चाहिए कि या फिर अंसारियों को हराकर भाजपा कृष्णानंद राय को सच्ची श्रद्धांजलि दे। पीयूष और आनंद में जब तक सियासी रार होती रहेगी, तब तक अंसारी यहां से जीतते रहेंगे। क्योंकि अंसारी परिवार भूमिहार वोटों को बांटने में हर बार सफल रहा है।
अभिनव सिन्हा के नाम पर भूमिहार एकजुट
वहीं इन दोनों की हार के बीच अगर मनोज सिन्हा के पुत्र अभिनव सिन्हा मैदान में आएं तो शायद अंसारियों को कड़ी टक्कर मिलेगी और भूमिहार वोटर एकजुट हो जाएंगे। क्योंकि सिन्हा को ही भूमिहार अपना सबसे बड़ा नेता मानता है। अभिनव काफी सांस्कारिक भी हैं। युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं। यही वजह रही कि मुहम्मदाबाद विधानसभा के रेवतीपुर गांव निवासी ओमप्रकाश राय को जिलाध्यक्ष बनाकर मनोज सिन्हा एक बड़ा सियासी दांव चलकर अंसारियों को चारों खाने चित करना चाहते हैं।


