मनोज सिन्हा के मनोज के राज्याभिषेक की तैयारी

0अचानक चर्चा में है मनोज सिन्ह का नाम

0जल्द भाजपा को मिलेगा नया जिलाध्यक्ष

019 नामांकन में 12 नामांकन पत्र हुए वैध

अजीत केआर सिंह, गाजीपुर। केंद्र एवं प्रदेश सरकार का चेहरा कहे जाने वाले भाजपा के जिलाध्यक्ष पद को लेकर घमासान अब धीरे धीरे शांत होने लगा है।

मनोज सिन्हा के अति करीबी बस्तपुर गांव निवासी मनोज सिंह को जिलाध्यक्ष की अगर बागडोर मिल जाए तो चौंकना नहीं चाहिए। वैसे अभी भी मौजूदा जिलाध्यक्ष सुनील सिंह का नंबर मनोज सिन्हा के यहां कम होता नजर नहीं आ रहा है। फिर भी अगर किसी कारणवश सुनील सिंह रिप्लेस होते हैं तो राजपूत समाज से आने वाले मनोज सिंह होंगे।

करीब डेढ़ दशक से भाजपा की सियासत को नजदीक से देखने वाले मरदह ब्लाक के बस्तपुर गांव निवासी मनोज सिंह भाजपा के खांटी कार्यकर्ता हैं। वह बूथ लेवल से लेकर जिले तक भाजपा के लिए काम कर चुके हैं। वह काफी मृदुभाषी बताए जाते हैं। उनके साथ सबसे अधिक प्लस यह है कि वह मनोज सिन्हा के अति करीबी हैं। मनोज सिन्हा के संघर्षों के समय चट्टान की तरह खड़े रहने वाले मनोज सिंह पर सिन्हा परिवार भरोसा कर सकता है।

क्योंकि वर्ष 1984 से लेकर 2019 तक लहुरीकाशी की सियासी भूमि को अपने धैर्य से सींचने वाले मनोज सिन्हा लोकसभा का चुनाव लड़ते रहे। यही वजह रही कि सिन्हा की बिना मर्जी के गाजीपुर के संगठन में एक पत्ता तक नहीं हिल सकता। भाजपा भी मनोज सिन्हा के सुझाव को सिर आंखों पर रखती हैै। अगर यहां का कोई भाजपा का नेता सिन्हा की मर्जी के बिना कुछ करना चाहता है तो उसे निराश होना पड़ता है।

कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने मनोज सिन्हा के खिलाफ जाकर काम किया तो उनका हश्र सबके सामने हैं। अब जिलाध्यक्ष के चुनाव का बिगुल बज चुका है। वैसे 19 नामांे के सापेक्ष 12 नामों की सूची तैयार करके उसे प्रदेश कार्यालय भेज दी गई है। इसमें जो सबसे चौंकाने वाला नाम है वह है मनोज सिंह बस्तपुर का। पहली बार उन्होंने जिलाध्यक्ष के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए हैं।

चूंकि मनोज सिन्हा के मनोज सिंह बेहद करीबी हैं। इसिलए बिना उनके इशारे पर वह नामांकन कर नहीं सकते हैं। जो भी उन्होंने श्री सिन्हा से मांगा वह उन्हें मिला। ऐसी परिस्थितियों में मनोज सिंह का जिलाध्यक्ष बनने की अधिक उम्मीद जताई जा रही है।

वैसे मौजूदा जिलाध्यक्ष सुनील सिंह का नाम अभी सबसे आगे बताया जा रहा है। सुनील सिंह का पक्ष यह है कि उनका कार्यकाल अभी एक वर्ष ही बीता है। इसलिए उन्हें मौका मिलना चाहिए। उधर चर्चा में आए मनोज सिंह बस्तपुर का कहना है कि उन्होंने जिलाध्यक्ष के लिए दावेदारी कर दी हैै। भगवान की मर्जी होगी तो वह जिलाध्यक्ष के रूप में काम करेंगे।

गाजीपुर केंद्र शासित जनपद भाजपा की सूची में शामिल हो गया है। यहां सब कुछ उपर से आता है। यही कारण रहा कि अनिल पांडेय ने अपना पर्चा वापस ले लिया। जिसे भी पार्टी जिलाध्यक्ष बनाएगी, हम लोग उसके साथ रहेंगे। बृजेंद्र राय, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा

बारह में एक लीडर बनेगा भाजपा का जिलाध्यक्ष
015 तक जिलाध्यक्ष की भाजपा करेगी घोषणा
चुनाव अधिकारी गीता शाक्य ने प्रेक्षक अश्विनी त्यागी की उपस्थिति में जानकारी दी कि जिलाध्यक्ष पद के लिए कुल 19 नामांकन पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से जांच के बाद 12 आवेदन पत्र वैध पाए गए। वहीं 7 नामांकन पत्र त्रुटिपूर्ण होने के कारण निरस्त कर दिए गए। प्रदेश परिषद सदस्य पद के लिए कुल 14 नामांकन पत्र प्राप्त हुए हैं। चुनाव अधिकारी ने बताया कि जांच में सही पाए गए 12 वैध नामांकन प्रदेश कमेटी को भेजे जाएंगे। इसके बाद हाई कमान आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लेगा।संगठन पर्व के तहत हुई इस नामांकन प्रक्रिया ने स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। भाजपा जिला कार्यालय पर पूरे दिन हलचल बनी रही, जिसमें कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। उधर कासिमाबाद की अधिकांश टीम धर्मेंद्र राय को जिलाध्यक्ष बनाने के लिए लाबिंग करती हुई नजर आई।



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