यह सच है! मनोज सिन्हा का होगा भाग्य उदय

0एलजी के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की चर्चा
0बिहार चुनाव में भूमिहार के वोटरों को लुभाने की तैयारी
0तीन बार सांसद व एक बार केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं मनोज
0भाजपा के किसी भी पद पर अभी तक नहीं दिए हैं सेवा
0पीएम मोदी एवं शाह के करीबी होने का मिल सकता है लाभ
अजीत केआर सिंह, गाजीपुर। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी की ताज पहन चुकी भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चेहरे के बीच लहुरीकाशी के लाल मनोज सिन्हा की चर्चा भी तेज हो चुकी है। चर्चा है कि मनोज सिन्हा का दस वर्ष बाद पुनः एक बार भाग्य उदय होने वाला है। उनका भी नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में शामिल हो चुका है। बिहार विधानसभा चुनाव में भूमिहार वोटरों को आकर्षित करने के लिए भाजपा ऐसा करने से तनिक भी हिचकिचाएगी नहीं। क्योंकि वहां पर नीतीश के सियासी इशारे से भाजपा एक तरह से तंग आ चुकी है।
अब समझएिगा कि मनोज सिन्हा ही क्यों आजकल चर्चा में हैं। उसका सबसे बड़ा कारण यह है वर्ष 2019 में लोकसभा का चुनाव हारने के बाद मनोज सिन्हा को कुछ माह बाद जम्मू एवं कश्मीर का उपराज्यपाल बनाकर भेजा गया। उन्हांेने बीते पांच वर्षों में विकास के नए आयाम स्थापित किए। उन्हें एक कुशल प्रशासक माना जाता है। यही कारण है कि कुछ ही समय बाद वह मोदी एवं अमित शाह के आंखों के तारे हो गए। वह बेहद विश्वास पात्र नेताओं में शामिल हो गए।
चूंकि जेपी नड्डा ब्राम्हण समाज से आते हैं। देश में ब्राम्हण समाज का अच्छा खासा वोट बैंक हैं। मनोज सिन्हा भूमिहार जाति से आते हैं। भूमिहार जाति ब्राम्हण की उपजाति मानी जाती है। भूमिहार भी अपने आपको ब्राम्हण ही मानता है। यूपी के पश्चिम में नगीना, मुरादाबाद, बागपत, सहारनपुर में भूमिहार को त्यागी के नाम से पुकारा जाता है। पूर्वांचल में गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, बलिया, मउ, गोरखपुर, देवरिया सहित करीब एक दर्जन से अधिक जिलों में भूमिहार जाति के लोगों की संख्या चुनावों में निर्णायक मानी जाती है।
गाजीपुर के मुहम्मदाबाद विधानसभा में सवा लाख भूमिहार मतदाता हैं। फिर भी भाजपा की अलका राय चुनाव हार जाती हैं। यहां पर कुछ लोकल फैक्ट्री के साथ साथ पीयूष एवं मुन्ना राय का आपसी विवाद भी बड़ा कारण माना जाता है। यहां से मुख्तार अंसारी के भतीजे मन्नू अंसारी सपा से विधायक हैं। खैर बिहार में बड़ी तादात में भूमिहार जाति के लोग निवास करते हैं। गोपालगंज, छपरा, भोजपुर, आरा, सासाराम, मोकामा औरंगाबाद, गया, नवादा, बेगूसराय, भागलपुर, जनपद शामिल है।
करीब बिहार में 8 प्रतिशत से अधिक भूमिहार समाज के लोगों का वोट हैं। जिन्हें सिंह, सिन्हा, पांडेय व राय मिश्रा आदि नामों से जाना जाता है। एलजी मनोज सिन्हा कौशिक भूमिहार वंश से आते हैं। कौशिक भूमिहार कासिमाबाद ब्लाक के सुरवत, पाली, रामगढ़, महरौड़ और मुहम्मदाबाद के मोहनपुरा गांव शामिल है। इसके अलावा गाजीपुर जिले में किनवार, दोनवार, सकरवार, कुढहनिया वंश से अन्य भूमिहार आते हैं।
मनोज सिन्हा की बिहार के भागलपुर में छावनी है। देवघर के पास उनकी ससुराल भी बताई जाती है। गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद विधानसभा के मोहनपुरा में उनके पिता वीरेंद्र सिन्हा प्रधानाचार्य थे। यही कारण है कि बिहार के भूमिहारों से घुले मिले मनोज सिन्हा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का बड़ा लाभ भाजपा उठा सकती है।
वैसे देखा जाए तो मनोज सिन्हा कभी संगठन में काम नहीं किए हैं। इस लिहाज से उनका नाम कट भी सकता है। बिहार का चुनाव ही एक ऐसा अवसर है कि जिसके जरिए मनोज सिन्हा का दोबारा भाग्य उदय एलजी के बाद होगा। इसको लेकर भूमिहार समाज के लोगों में खुशी की लहर है।
भूमिहार समाज के लिए होगी गौरव की बात
किनवार कीर्ति स्तंभ सहरमाडीह भांवरकोल के संरक्षक अरविंद राय ने कहा कि अगर मनोज जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है तो हमारे समाज के लिए गौरव की बात होगी। वह विकास पुरूष के साथ साथ सर्वमान्य नेता के तौर पर राष्ट्रीय क्षीतिज पर स्थापित हो चुके हैं।
सिन्हा के अलावा इनकी भी चर्चा
मनोज सिन्ह के अलावा शिवराज सिंह चौहान, धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, मनोहरलाल खट्टर, डी पुडंेश्वरी, जी किशन रेड्डी, विनोद तावड़े का नाम शामिल है। मोदी एवं अमित शाह के नेतृत्व वाली बीजेपी हमेशा से चर्चाओं में रही है। मनोज सिन्हा के अलावा उक्त नाम सबसे अधिक चर्चाओं में हैं। मनोज सिन्हा अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो यह गाजीपुर के इतिहास की अप्रत्याशित घटना होगी।

