अभिनव सिन्हा के करईल प्रेम से सियासी हलचल

0मुहम्मदाबाद पहुंचकर यूपी सरकार का किया था बखान
0कार्यक्रम में नहीं दिखी थी दावेदार पीयूष की मौजूदगी
0अंसारियों को पराजित करने के लिए अभिनव की डिमांड
0पीयूष व मुन्ना के झगड़े से भाजपा को हो रहा है नुकसान
अजीत केआर सिंह, गाजीपुर। भाजपा के युवा नेता एवं जम्मू एवं कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा के पुत्र अभिनव सिन्हा के करईल प्रेम ने कई सियासी सुरमाओं की नींद उड़ा दी है। पिछले दिनों मुहम्मदाबाद में भाजपा सरकार के आठ वर्ष पूरा करने पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद अभिनव के इर्द गिर्द टिकट के दावेदार पीयूष राय नहीं दिखाई दिए थे।
तबसे ऐसी चर्चा तेज हो गई है कि दोनों भाइयों के झगड़े को शांत कराने के लिए अभिनव को मुहम्मदाबाद भेजा जा रहा है। और उनको यहां से लड़ना जरूरी हो गया है। वरना 2027 में अंसारियों की जीत की गूंज फिर से सुनाई देगी। यही वजह रही तेज तर्रार ओमप्रकाश राय को भाजपा जिलाध्यक्ष बनाकर भूमिहारों को एक पाले में किया जा सके।
गाजीपुर में भाजपा के मजबूत स्तंभ जम्मू एवं कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा यहां से तीन बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने पहला चुनाव 1984 में गाजीपुर लोकसभा का लड़ा था। तब से लेकर आज तक सिन्हा अपने धैर्य से गाजीपुर को सींच रहे हैं। उन्होंने यादव एवं मुस्लिम बाहुल्य जैसे गाजीपुर में सात बार पराजय का सामना किया।
2004 से 2014 तक दस वर्ष तक वनवास झेला। तब ऐसा कहा गया कि मनोज सिन्हा की सियासत का अंत हो चुका है। मगर मनोज सिन्हा के धैर्य ने एक बार फिर साथ दिया और 2014 का लोकसभा चुनाव उनके जीवन में नई सियासी खुशियां लेकर आया और वह तीसरी बार सांसद बने। यहीं से शुरू हुआ उनके राष्ट्रीय चेहरा बनने का सफर। उन्होंने गाजीपुर में विकास के नए आयाम स्थापित किए।
हजारों करोड़ों की परियोजनाएं उनके विकास की कहानी की गवाह बनीं। मगर 2019 का लोकसभा हराने के बाद भी धैर्य नहीं टूटा तो पीएम ने उन्हें एलजी बनाकर जम्मू एवं कश्मीर भेज दिया। ऐसी चर्चा रही कि सिन्हा 2024 का चुनाव लड़ेंगे और उनकी जीत तय है। ऐसा भी कहा गया कि अगर वह नहीं लड़े तो उनके पुत्र अभिनव सिन्हा मैदान में होंगे। उनका टिकट फाइनल भी था। एैन वक्त पर उनकी जगह पारस राय को प्रत्याशी बना दिया गया। वह हार गए, मगर अभिनव सिन्हा का धैर्य अपने पिता की तरह सफलता की सीढ़ियों पर आगे बढ़ाता रहा। वह निराश नहीं हुए।
भाजपा की नीतियों को जनजन तक पहुंचाते रहे। मार्च में मुहम्मदाबाद ब्लाक में उनका कार्यक्रम लगा। चूंकि मौका बड़ा था। सभी भाजपा नेताओं को विधानसभा स्तर और ब्लाक स्तर पर कहा गया था कि आठ वर्ष पूरे होने पर सरकार का गुणगान करना है। मुहम्मदाबाद अभिनव सिन्हा पहुंचे। मगर टिकट के दावेदारों का कहीं अता पता नहीं था। सिर्फ अभिनव के साथ मुहम्मदाबाद ब्लाक प्रमुख ही दिखाई दिए। जबकि अभिनव सिन्हा अपने पिता की गैरमौजूदगी का एहसास लोगों को हमेशा कराते रहे हैं। लोग उनसे जुड़ते भी हैं। कार्यक्रम में पीयूष की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही।
ऐसा तब लगने लगा था कि कहीं न कहीं सभी को यह पता चल गया है कि 2027 में अंसारियों को हराने के लिए अभिनव सिन्हा जैसे बड़े चेहरे की जरूरत पड़ेगी। जिस पर वहां के भूमिहार मतदाता एकजुट होकर अंसारियों को हराने में बड़ी भूमिका अदा करेंगे। देखा जाए तो पूरे जिले में सर्वाधिक सवा लाख भूमिहार मतदाता सिर्फ मुहम्मदाबाद में होने के बावजूद वहां पर अंसारियों का बार बार जीतना कहीं न कहीं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को चिंतित करने के लिए काफी है।
सूत्र बताते हैं कि अभिनव लोकसभा लड़ना चाहते हैं। अगर पार्टी को यह लगा कि अभिनव अंसारियों को कमजोर करने के लिए भूमिहार वोटों को एक जगह सहेज सकते हैं तब अभिनव प्रत्याशी बनेंगे तो किसी को चौंकना नहीं चाहिए।
सीएम से मिले थे पीयूष राय
पिछले दिनों पूर्व विधायक अलका राय के पुत्र पीयूष राय की मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात की तस्वीर वायरल हो रही थी। तब ऐसा कहा जा रहा था कि आगामी चुनाव में पीयूष को भाजपा टिकट देगी। इस सवाल के जवाब में पीयूष और आनंद राय के झगड़े को खूब तूल दिया गया। कहा गया कि जब तक दोनों चचेरे भाई लड़ते रहेंगे, अंसारियों को हराना मुश्किल होगा। सबसे खास बात यह है कि मुहम्मदाबाद में अंसारियों को हराने में अगर दोनों के झगड़े रोड़ा अटका रहे हैं तब तीसरे विकल्प के तौर पर जम्मू एवं कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा के पुत्र अभिनव सिन्हा का नाम तैर करके सामने आ रहा है। वैसे भूमिहार मतदाताओं का साफ कहना है कि कृष्णानन्द राय के परिवार को चुनाव लड़ने से अधिक अंसारियां को हराने पर जोर देना चाहिए। क्योंकि बुलडोजर की गर्जना के बाद भी मोहम्मदाबाद से अंसारियां का चुनाव जीतना भाजपा के लिए बड़ा शर्मनाक रहा है।




