डा. विजय यादव की चमकेगी सियासत!

0विधानसभा चुनाव 2027 को जीतने के लिए चाहिए साथ

0भूमिहार जिलाध्यक्ष के बाद पिछड़ों को साधने की तैयारी

0भाजपा में आकर्षक चेहरे के रूप में थी विजय की पहचान

अजीत केआर सिंह, गाजीपुर। भाजपा विधानसभा 2027 चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर भूमिहार समाज से जिलाध्यक्ष बनाने के बाद अब पार्टी पिछड़ों को साधने की तैयारी में जुट गई है। गाजीपुर में बिना पिछड़ों को साधे चुनाव जीतना मुश्किल है।

ऐसे हालात में चर्चा तेज हो गई है कि क्या डा. विजय यादव को फिर पिछड़ों को एकजुट करने के लिए बुलाया जाएगा। विजय यादव भाजपा में एक ऐसे आकर्षक पिछड़ा चेहरा थे, जिसका लाभ पार्टी को 2017 के विधानसभा चुनाव में मिला था। डा. विजय जैसे चेहरे पर्दा के पीछे चले गए, 2022 और 2024 के चुनाव में भाजपा बुरी तरह से हार गई।

डा. विजय यादव के विषय में बता दें कि कृष्ण सुदामा ग्रुप आफ कालेजेज के निदेशक के तौर पर उनकी बड़ी पहचान है। इसके साथ ही वह गाजीपुर के जंगीपुर विधानसभा प्रभारी और भाजपा किसान मोर्चा में मंत्री के साथ ही कोषाध्यक्ष की भूमिका अदा कर चुके हैं। यही नहीं उनका गाजीपुर की भाजपा में बड़ा नाम था। उन्हें कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा का बेहद करीबी माना जाता था। एक दौर था, जब सिन्हा गाजीपुर आते थे तो उनके साथ साए की तरह डा. विजय यादव दिखाई देते थे। यही नहीं वह यदुवंशियों के साथ ही पिछड़ों में काफी लोकप्रिय थे। जब करंडा के जिला पंचायत का उपचुनाव हुआ तो डा. विजय को ऐसे बूथों की जिम्मेदारी दी गई जहां पर यादव बाहुल्य वोटर थे।

जब परिणाम आए तो पहली बार यादव बाहुल्य बूथों पर भाजपा को जीत मिली। वह जिला पंचायत अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार थे। मगर एैन वक्त पर सपना सिंह को प्रत्याशी बना दिया गया। खैर एक समय ऐसा आया कि डा. विजय यादव की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए उनके खिलाफ साजिश भी रची गई, मगर जब जांच हुई तो कइयों की पोल खुल गई। इस घटना से डा. विजय यादव का मन इतना दुखी हुआ कि वह गाजीपुर की सियासी दुनिया से ही दूरी बना लिए। उन्होंने हरियाणा सहित अन्य राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका अदा की। उनके कार्यों से भूपेंद्र यादव सरीके बीजेपी के बड़े नेता खुश हुए। पतंजलि योग संस्थान के बाबा रामदेव खुश होकर करीब एक दर्जन अच्छी नस्ल की गायें भी विजय को उपहार स्वरूप प्रदान की थी।

विजय यादव की कमी को दूर करने के लिए भाजपा ने सादात के एक यादव नेता को आगे किया। मगर जो सरलता डा. विजय यादव में थी, वह कहीं और नहीं देखी। डा. विजय यादव को सियासत का सबसे सरल नेता के तौर पर स्थापित माना गया। सियासत के जानकारों का कहना है कि अगर 2027 के विधानसभा की सभी सीटें भाजपा को जीतनी है तो डा. विजय यादव जैसे नेताओं को पुनः गाजीपुर की सियासत में सक्रिय करना पड़ेगा। जमीन पर काम करना होगा। वरना 2022 की हार का बदला लेने में भाजपा को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। जब इस संबंध में डा. विजय यादव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनका पूरा जीवन भाजपा के लिए समर्पित हैं। भाजपा ही एक ही पार्टी है जो युवाओं के सपनों को सच करनी ताकत रखती है।

गरीबों के लिए कृष्ण की भूमिका में विजय

गाजीपुर। सियासत में अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले डा. विजय यादव सामाजिक सरोकार में भी बड़ी भूमि अदा करते हैं। जहां पर कृष्णसुदामा ग्रुप आफ कालेजेज के निदेशक के तौर पर उन्होंने गरीब छात्रों के सपनों को भी संजोकर रखा। यानि जिन छात्रों के पास पढ़ने के पैसे नहीं थे, वह भी अपने सपनों को इस कालेज में डा. विजय यादव के सहयोग से सच कर रहे हैं। यही नहीं उन्होंने दस हजार उन लोगों के आंखों की चमक वापस लाई जिनका कोई नहीं था। इसकी पूरे गाजीपुर में ही नहीं बल्कि अन्या जिलों में भी चर्चा होती रही है। इसको लेकर उन्हें कई बार देश के साथ साथ विदेशों में भी पुरस्कृत किया जा चुका है। सामाजिक रूचि को देखते हुए कई बार उनके कालेज में पजंजलि योग पीठ के स्वामी रामदेव भी पधार चुके हैं। यही वजह रही कि जब कोरोना काल में जिला पंचायत का चुनाव हुआ तो मनिहारी पंचम से उनकी पत्नी डा. वंदना यादव ने राजभर एवं मुस्लिम और दलित के अलावा अन्य वोटरों का भी दिल जीतने में सफल रही। उनके खिलाफ कई दिग्गज नेता मैदान में थे। उनसे हारने वाले कई बार जिला पंचायत सदस्य एवं ब्लाक प्रमुख तक रह चुके हैं। इस जीत की चर्चा भाजपा के साथ अन्य दलों में भी होती रही। इस बार पुनः वंदना यादव मनिहारी पंचम से चुनाव लड़ेंगी। ऐसा माना जा रहा है कि उनकी एक बार फिर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मजबूत दावेदारी होगी। ऐसा कहा गया कि टिकट कटने के बाद भी डा. विजय यादव ने भाजपा प्रत्याशी सपना सिंह को पूरी ताकत लगाकर चुनाव में विजयी बनवाने में अहम भूमिका अदा की थी।



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