भाजपा से राधेमोहन की शर्त

0एक वर्ष से ज्यादा समय से सीएम से मिल रहे राधेमोहन
0राधेमोहन के पार्टी में आने से भाजपा को मिलेगा फायेदा
0राधेमोहन व भाजपा की कौन सी शर्त बन रही है बाधक
अजीत केआर सिंह, गाजीपुर। आज राधेमोहन लखनउ में मौजूद हैं। वह सीएम योगी से मिलकर फिर अपना सियासी टेम्पो हाई करेंगे। अब सवाल उठता है कि बीते डेढ़ वर्ष से सीएम योगी से मुलाकात करने के बाद भी वह भाजपा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
आखिर उनकी भाजपा में इंट्री कौन रोक रहा है। अब सवाल उठता है कि राधेमोहन और भाजपा के बीच कौन सी शर्त टकरा रही है जिससे वह भाजपाई नहीं बन पा रहे हैं। राधेमोहन के पार्टी में आने से भाजपा को विधानसभा चुनाव में लाभ मिलेगा। क्योंकि वह सपा की हर सियासी नस से वाकिफ हैं।
समाजवादी पार्टी से वर्ष 2009 के लोकसभा में अफजाल अंसारी को हराकर राधेमोहन सिंह पहली बार सांसद बने थे। इससे पहले वह जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। इसके बाद जब 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो सपा ने उनका टिकट काटकर बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या सिंह कुशवाहा को दे दिया।
जिसका राधेमोहन ने खुला विरोध किया था। उन्होंने मनोज सिन्हा के खिलाफ प्रचार नहीं किया। 2019 में वह फिर प्रयासरत रहे कि उन्हें सपा टिकट दे दे, लेकिन सपा बसपा के गठबंधन में बसपा प्रत्याशी रहे अफजाल अंसारी ने बाजी मार ली। जबकि यह चर्चा रही कि इस बार राधेमोहन सपा के उम्मीदवार होंगे, मगर अफजाल उम्मीदवार हो गए। इधर 2022 के विधानसभा चुनाव में दोबारा भाजपा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में वापसी कर ली।
फिर क्या था राधेमोहन का दिल और दिमाग दोनों भाजपाई हो गया। उन्होंने विधानसभा चुनाव के बाद लगातार भाजपा से नजदिकियां बढ़ा दी। वह डेढ़ वर्ष में करीब एक दर्जन से अधिक बार सीएम योगी से मुलाकात किए। राधेमोहन अपने यहां करमपुर में सीएम को बुलाकर भीड़ की ताकत दिखाने में कामयाब रहे। इसके बाद भी कई बार मुलाकात हुई। आज वह शुक्रवार को सीएम से मिलने के लिए लखनऊ में मौजूद हैं।
अब सवाल उठता है कि राधेमोहन के भाजपा में आने के बाद किसको सियासी फायेदा होगा। चूंकि गाजीपुर की भाजपा का रिमोट कंट्रोल मनोज सिन्हा के पास है। वह गाजीपुर में जो चाहते हैं वही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व करता है। मनोज सिन्हा यह जानते हैं कि राधेमोहन सिंह को भाजपा में लाने पर एमएलसी गुट को झटका लगेगा तो सैदपुर को भी सियासी नुकसान होगा। इसके अलावा वह अफजाल अंसारी के साथ ही ओपी सिंह को भी मजबूती से तगड़ा जवाब देने में कामयाब होंगे। 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को फायेदा होगा।
मनोज सिन्हा को इस बात का भय है कि अगर भाजपा में राधेमोहन मजबूत हुए और मौजूदा शीर्ष नेतृत्व कमजोर हुआ तो अभिनव सिन्हा को सियासी रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि अभिनव के मुकाबले राधेमोहन सिंह के पुत्र अनिकेत सिंह भी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। वैसे अभिनव सिन्हा किसी कारण वश 2027 का चुनाव मुहम्मदाबाद से नहीं लड़े तो 2029 के लोकसभा चुनाव की वह तैयारी करेंगे।
फिर भी राधेमोहन सिंह मानते हैं कि भाजपा में एमएलसी के अलावा कोई उन्हें सियासी रूप से कमजोर नहीं कर सकता है। चूंकि मनोज सिन्हा सेंट्रल की राजनीति में इंट्री मारकर काग दृष्टि गाजीपुर की सियासत पर लगाए हुए हैं।
