ओमप्रकाश राय के पीछे किसका चेहरा

0जिले में दलित और पिछड़े पर नहीं बन पा रही बात

0सुनील सिंह और मनोज में किसी एक पर सहमति

016 मार्च की दोपहर में जिला प्रभारी करंेगे घोषणा

अजीत केआर सिंह
गाजीपुर। क्या तुम्हें पता है ऐ गुलशन, मेरे दिलबर आने वाले हैं, कलियां ना बिछाना राहों में हम दिल को बिछाने वाले हैं...। दिल बेताब का यह गाना भाजपा के अगले जिलध्यक्ष को लेकर आजकल कार्यकर्ताओं एवं नेताओं पर सटीक बैठ रहा है।

महीनों से चले आ रहे सस्पेंस से पर्दा 24 घंटे के भीतर हट जाएगा और जैसे ही 16 मार्च की दोपहर दो बजे जिला प्रभारी राकेश त्रिवेदी घोषणा करेंगे कार्यकर्ता नए जिलाध्यक्ष के साथ अबीर गुलाल लगाकर जश्न में डूब जाएंगे। इसको लेकर भाजपा में जबरदस्त हलचल का माहौल है।

मौजूदा भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील सिंह से पहले के जिलाध्यक्षों पर नजर दौड़ाई जाए तो सर्वाधिक सवर्ण समाज के ही चेहरे ही जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुए। मशहूर चिकित्सक डा. डीपी सिंह के पिता बच्चन सिंह गाजीपुर भाजपा के पहले जिलाध्यक्ष बनाए गए थे। वह छह अप्रैल 1980 तक इस पद पर काबिज रहे। इसके बाद यशवीर सिंह दूसरे जिलाध्यक्ष बने। उनको 1980 से 1984 तक इस पद पर रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

विजय शंकर राय 1984 से 1988 तक, सत्यनरायण तिवारी 1988 से 1993 तक, राजेंद्र यादव 1993 से 1996 तक, सचिच्दानंद राय चाचा 1996 से 2000, प्रभुनाथ चौहान 2000 से 2003, उदय प्रताप सिंह 2003 से 2006, रामतेज पांडेय 2006 से 2009 तक जिलाध्यक्ष रहे। बृजेंद्र राय 2009 से 2012 तक काबिज रहे।

बृजेंद्र राय और केबी राय के बीच हुई थी वोटिंग

बृजेंद्र राय ऐसे जिलाध्यक्ष हुए जिनके निर्वाचन से पहले भाजपा के 90 सदस्यों को वोटिंग करना पड़ा। हुआ यंू कि मनोज सिन्हा केबी राय को चाहते थे, लेकिन बृजेंद्र राय भी चुनाव लड़ने की घोषणा करके सनसनी फैला दिए। उस दौरान मनोज सिन्हा ने बहुत कोशिश की, लेकिन बृजेंद्र राय नहीं मानें और जब 90 मंडल अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों ने वोटिंग किया तो 11 वोट से बृजेंद्र राय चुनाव जीतकर पहली बार मनोज सिन्हा के सामने चुनौती पेश किए। हालांकि जब अगला चुनाव हुआ तो केबी राय जिलाध्यक्ष बन गए। बृजेंद्र राय की यही गुस्ताखी आज तक उन्हें सियासी संघर्ष के लिए और मजबूर कर रही है। जबकि 1984 में जब पहली बार मनोज सिन्हा चुनाव लड़े थे, तब सादात क्षेत्र मंे मंडल मंत्री की भूमिका में रहे बृजेंद्र राय विरोधी पार्टियों से दो दो हाथ कर रहे थे। हालांकि अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अवश्य बृजेंद्र राय के सियासी जख्मों पर मरहम लगाकर उन्हें बड़ी राहत देने का काम किया है।

इसके बाद रामहित राम संयोजक मई 2012 से 18 दिसंबर 2012 तक, केबी राय 2012 से 2015 तक, भानु प्रताप सिंह 2015 से 2024 तक और सुनील सिंह 2024 से अब तक इस पद पर काबिज हैं। अब देखना होगा कि सुनील सिंह अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या फिर उन्हें पूर्व जिलाध्यक्ष का खिताब मिलता है, यह सब उनके भाग्य पर निर्भर करता है। वैसे सुनील सिंह के अलावा मनोज सिंह, ओमप्रकाश राय, प्रवीण सिंह बबुआ, राजेश भारद्वाज का भाग्य प्रबल बताया जा रहा है। इससे इतर देखा जाए तो सुनील सिंह और मनोज सिंह में जिलाध्यक्ष को लेकर मुख्य मुकाबला नजर आता है।

अगर भाजपा ने दलित महिला पर दांव नहीं लगाया तब इन दोनों में किसी एक का जिलाध्यक्ष बनना पूरी तरह से तय माना जा रहा है।

चुनाव अधिकारी एवं राज्यसभा सांसद गीता शाक्या का कहना है कि वह किसी कार्यक्रम में बिजी हैं। हमारे प्रतिनिधि के तौर पर जिला प्रभारी राकेश त्रिवेदी ही गाजीपुर में अगले जिलाध्यक्ष की घोषणा दो बजे करेंगे। राकेश त्रिवेदी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि दोपहर दो बजे तय हो जाएगा कि कौन अगला जिलाध्यक्ष होगा।

भाजपा जिलाध्यक्ष कोई भी बने, मगर मनोज सिन्हा की सहमति के बगैर कुछ भी संभव नहीं होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र पांडेय और मनोज सिन्हा ही जानते होंगे कि 2027 का चुनाव भाजपा गाजीपुर में किस चेहरे के बूते लड़ेगी।

उधर पूर्व जिलाध्यक्ष बृजेंद्र राय ने बताया कि हम लोग अगले जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में 2027 का चुनाव लड़ेंगे और विपक्ष से 2022 की हार का बदला लेकर महाराज जी को तीसरी बार सीएम बनाने के लिए संकल्पित होंगे।



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